Knowledge ID EMS007

भारत में पैसा कौन बनाता है? RBI, नोट कौन छापता है और भारतीय मुद्रा कैसे बनती है

जब हम ₹100, ₹200 या ₹500 का नोट अपने हाथ में लेते हैं, तो अक्सर हमारे मन में एक सवाल जरूर आता है—भारत में पैसा कौन बनाता है? क्या सरकार पैसा बनाती है? क्या RBI नोट छापता है? अगर RBI नोट छापता है, तो क्या वह जब चाहे उतने नोट छाप सकता है? और क्या नोट छापना ही पैसा बनाने के बराबर है?

इन सवालों के जवाब पहली नजर में आसान लगते हैं, लेकिन असल में इनके पीछे भारत की पूरी monetary और banking system काम करती है। भारत में RBI यानी Reserve Bank of India, भारत सरकार, currency printing presses, banks और banking system की अलग-अलग भूमिकाएं हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नोट छापना और पैसा बनना एक ही चीज नहीं है।

इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि भारत में पैसा कौन बनाता है, RBI की क्या भूमिका है, नोट कौन छापता है, भारतीय मुद्रा कहाँ बनती है, नोट लोगों तक कैसे पहुंचते हैं और बैंकिंग system money creation में कैसे भूमिका निभाता है।

भारत में पैसा कौन बनाता है RBI और नोट छापने की प्रक्रिया

ध्यान रखें: इस लेख में “पैसा” शब्द का इस्तेमाल व्यापक अर्थ में money के लिए और “नोट” शब्द physical currency के लिए किया गया है।

Table of Contents

भारत में पैसा कौन बनाता है?

इस सवाल का सबसे छोटा जवाब है—भारत में banknotes जारी करने का अधिकार RBI के पास है, लेकिन पैसा केवल छपे हुए नोटों तक सीमित नहीं है।

Reserve Bank of India Act, 1934 के तहत RBI को भारत में banknotes जारी करने का अधिकार प्राप्त है। RBI अपनी official information में भी बताता है कि वह देश का sole note issuing authority है। वहीं ₹1 का नोट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है।

इसलिए अगर सवाल specifically यह है कि “भारत में नोट कौन जारी करता है?” तो सामान्य banknotes के लिए जवाब है—RBI

लेकिन अगर सवाल है कि “नोट कौन छापता है?” तो जवाब थोड़ा अलग है।

नोटों की physical printing भारत की चार currency presses में होती है। इनमें दो presses Government of India की कंपनी SPMCIL के अंतर्गत हैं और दो RBI की subsidiary BRBNMPL के अंतर्गत हैं।

यही अंतर इस पूरे विषय को समझने की पहली सीढ़ी है।

पैसा, मुद्रा और नोट क्या एक ही चीज हैं?

आम बातचीत में हम पैसा, मुद्रा और नोट को अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन economics की नजर से देखें तो इनके बीच अंतर समझना जरूरी है।

नोट physical currency का एक रूप है।

मुद्रा यानी currency वह माध्यम है जिसे किसी देश में भुगतान और लेन-देन के लिए आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। भारत की मुद्रा की मुख्य इकाई रुपया है, जिसका symbol ₹ है।

वहीं money का दायरा इससे भी बड़ा है। आज पैसा केवल हमारे हाथ में मौजूद नोट और सिक्के नहीं हैं। बैंक accounts में मौजूद deposits और modern banking system में बनने वाली money भी broader money system का हिस्सा होती है।

अगर आप समझना चाहते हैं कि पैसा और मुद्रा आज की व्यवस्था तक कैसे पहुंचे, तो हमारे पिछले लेख “पैसे का इतिहास” से इसकी शुरुआत समझ सकते हैं।

पैसे का इतिहास: Money की शुरुआत कैसे हुई

RBI क्या करता है?

RBI यानी Reserve Bank of India भारत का केंद्रीय बैंक है। Currency management RBI के महत्वपूर्ण कामों में से एक है, लेकिन RBI का काम केवल नोट छापना नहीं है।

RBI currency की जरूरत का अनुमान लगाने, banknotes जारी करने, currency circulation को manage करने और लोगों तक अच्छी quality के notes पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

RBI अलग-अलग denominations की मांग, circulation में मौजूद notes, पुराने और खराब notes को replace करने की जरूरत तथा economy से जुड़े कई factors को ध्यान में रखकर banknotes की requirement का अनुमान लगाता है।

RBI की official जानकारी के अनुसार notes in circulation की expected growth, GDP growth, inflation, interest rates, non-cash payment methods की growth और पुराने notes को replace करने की आवश्यकता जैसे factors को ध्यान में रखा जाता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि RBI बस यह तय करता है कि “आज इतने नोट छाप दो।” इसके पीछे एक पूरी planning process होती है।

RBI की official Currency FAQ पढ़ें

नोट कौन छापता है?

अब उस सवाल पर आते हैं जिसे सबसे ज्यादा लोग पूछते हैं—नोट कौन छापता है?

भारत में banknotes चार currency presses में print किए जाते हैं। इनमें दो presses Government of India की Security Printing and Minting Corporation of India Limited यानी SPMCIL के अंतर्गत हैं और दो presses RBI की subsidiary BRBNMPL के अंतर्गत हैं।

  • नासिक: Government of India की currency press
  • देवास: Government of India की currency press
  • मैसूर: RBI की subsidiary BRBNMPL की currency press
  • सालबोनी: RBI की subsidiary BRBNMPL की currency press

इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि “RBI अपनी building में सारे नोट छापता है।”

RBI currency issuance और currency management में केंद्रीय भूमिका निभाता है, जबकि notes की physical printing authorised currency presses में होती है।

भारत में नोट कहाँ छापे जाते हैं?

भारत में currency printing के चार प्रमुख केंद्र हैं। इन्हें आसान भाषा में समझें तो दो Government of India की ownership वाली printing presses हैं और दो RBI की subsidiary के अंतर्गत हैं।

1. नासिक Currency Press

महाराष्ट्र के नासिक में Government of India के नियंत्रण वाली currency press है। यह SPMCIL के अंतर्गत आती है।

2. देवास Currency Press

मध्य प्रदेश के देवास में भी Government of India की currency press स्थित है। यह भी SPMCIL के अंतर्गत काम करती है।

3. मैसूर Currency Press

कर्नाटक के मैसूर में RBI की subsidiary BRBNMPL की currency press स्थित है।

4. सालबोनी Currency Press

पश्चिम बंगाल के सालबोनी में BRBNMPL की दूसरी currency printing press स्थित है।

इन presses में सामान्य printing की तरह सिर्फ कागज पर तस्वीर और नंबर नहीं छापे जाते। भारतीय banknotes में कई security features होते हैं, जिनका उद्देश्य नकली नोटों की संभावना को कम करना और असली नोटों की पहचान आसान बनाना है।

नोट पर RBI का नाम क्यों लिखा होता है?

अगर आप किसी भारतीय banknote को ध्यान से देखें तो उस पर Reserve Bank of India का नाम दिखाई देता है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कारण है—RBI banknotes का issuer है।

नोट पर लिखा “I promise to pay the bearer the sum of…” भी इसी monetary व्यवस्था का हिस्सा है। RBI की official FAQ के अनुसार यह clause banknote के issuer के रूप में RBI की liability को दर्शाता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि आप RBI के पास जाकर ₹500 का नोट देकर उसके बदले सोना मांग सकते हैं। यह note issuer की monetary obligation को दर्शाने वाला legal framework है।

₹1 का नोट बाकी नोटों से अलग क्यों है?

भारतीय मुद्रा व्यवस्था में ₹1 का नोट एक interesting exception है।

अधिकांश banknotes RBI द्वारा जारी किए जाते हैं, लेकिन ₹1 का नोट Government of India द्वारा जारी किया जाता है।

इसलिए अगर कोई पूछे कि “क्या भारत का हर नोट RBI जारी करता है?” तो जवाब होगा—नहीं। ₹1 का नोट इसका महत्वपूर्ण exception है।

RBI की official FAQ के अनुसार ₹1 का note Government of India की liability है और इसे legal tender के रूप में मान्यता प्राप्त है।

RBI की Indian Currency FAQ देखें

क्या RBI जब चाहे उतने नोट छाप सकता है?

नहीं।

यह भारतीय currency system को लेकर सबसे आम गलतफहमियों में से एक है।

अगर किसी देश का central bank बिना economic requirement के लगातार बहुत बड़ी मात्रा में currency जारी करता रहे, तो money supply और goods तथा services की supply के बीच imbalance पैदा हो सकता है। इसका असर prices और inflation पर पड़ सकता है।

इसीलिए RBI banknotes की जरूरत का अनुमान कई factors को देखकर करता है।

RBI के अनुसार notes की printing requirement में circulation में notes की expected growth, पुराने और खराब notes को replace करने की जरूरत तथा GDP growth, inflation, interest rates और non-cash payments जैसे macroeconomic factors को ध्यान में रखा जाता है।

इसलिए currency printing को एक planned supply process के रूप में समझना ज्यादा सही है।

अगर अर्थव्यवस्था बढ़ रही है तो नए नोटों की जरूरत क्यों पड़ती है?

मान लीजिए किसी शहर में पहले 10 लाख लोग रहते थे और कुछ वर्षों बाद वहां की population और economic activity काफी बढ़ गई। लोगों की income बढ़ी, व्यापार बढ़ा, दुकानों और businesses की संख्या बढ़ी और transactions भी बढ़ गए।

अगर cash transactions की जरूरत बढ़ती है तो banking system को ज्यादा currency notes की आवश्यकता हो सकती है।

इसके अलावा पुराने notes लगातार खराब होते रहते हैं। नोट लोगों के हाथों, दुकानों, banks, ATMs और businesses से होकर गुजरते हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल होने के कारण कुछ notes dirty, damaged या unfit हो जाते हैं।

ऐसे notes को circulation से हटाकर उनकी जगह नए notes लाने पड़ते हैं।

इसलिए हर नया printed note economy में “नया पैसा” जोड़ रहा हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार नया note सिर्फ पुराने खराब note को replace करने के लिए छापा जाता है।

पुराने और खराब नोटों का क्या होता है?

क्या आपने कभी बहुत पुराना, फटा या गंदा नोट बैंक में जमा किया है?

Banking system ऐसे notes को अलग करता है। RBI की Clean Note Policy का उद्देश्य लोगों को अच्छी quality के banknotes उपलब्ध कराना है।

Circulation से वापस आने वाले notes को examine किया जाता है। जो notes दोबारा इस्तेमाल के योग्य होते हैं उन्हें फिर से circulation में भेजा जा सकता है, जबकि soiled और mutilated notes को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार destroy किया जाता है।

इसलिए नया note छपने का एक बड़ा कारण पुराने notes को replace करना भी होता है।

इसे सरल तरीके से समझें:

नया note छपा = जरूरी नहीं कि उतनी ही मात्रा में नया पैसा पैदा हो गया।

हो सकता है वह सिर्फ पुराने note की जगह आया हो।

नोट छपने के बाद लोगों तक कैसे पहुंचता है?

मान लीजिए currency press में नए ₹500 के notes तैयार हो गए। ये notes सीधे किसी दुकान या ATM में नहीं पहुंचते। इनके distribution के लिए एक पूरा currency management network काम करता है।

RBI की official जानकारी के अनुसार printing presses से banknotes RBI के Issue Offices तक आते हैं और फिर currency chests के जरिए banking network में distribute किए जाते हैं।

Currency chests ऐसे authorised storage locations हैं जहां banknotes और rupee coins को RBI की ओर से stock किया जाता है और फिर आसपास की bank branches तक distribution किया जाता है।

पूरी प्रक्रिया को इस तरह समझ सकते हैं:

Currency Printing Press

RBI Currency Management

Currency Chest

Bank Branch / ATM

लोग और Businesses

दैनिक लेन-देन

Currency Chest क्या होता है?

Currency chest को आप एक authorised currency storage centre की तरह समझ सकते हैं।

RBI की official FAQ के अनुसार select scheduled banks को currency chests establish करने की अनुमति होती है। यहां banknotes और rupee coins को RBI की ओर से stock किया जाता है और फिर जरूरत के अनुसार आसपास की bank branches तक पहुंचाया जाता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर छोटी bank branch में बहुत बड़ी मात्रा में cash reserve रखा रहता है। Currency distribution एक structured network के जरिए होता है।

यही network देश के अलग-अलग हिस्सों में cash की availability बनाए रखने में मदद करता है।

सिक्के कौन बनाता है?

अब एक और confusion दूर करते हैं। नोट और सिक्के एक ही संस्था नहीं बनाती।

RBI की भूमिका coins के मामले में अलग है। भारत सरकार coins के design और minting के लिए जिम्मेदार है। RBI की भूमिका मुख्य रूप से Government of India द्वारा supplied coins को circulation में distribute करने की होती है।

भारत में SPMCIL की चार mints हैं:

  • Mumbai
  • Hyderabad
  • Kolkata
  • Noida

इन mints में विभिन्न denominations के coins mint किए जाते हैं।

इसलिए आसान comparison इस तरह समझें:

  • Banknotes: RBI issue करता है।
  • ₹1 Note: Government of India issue करती है।
  • Coins: Government of India mint करती है।
  • Coins का circulation: RBI की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

क्या नोट छापना ही पैसा बनाना है?

यही इस पूरे article का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

नहीं।

Physical currency printing और broader money creation दो अलग concepts हैं।

मान लीजिए RBI ने ₹100 करोड़ के पुराने notes को replace करने के लिए ₹100 करोड़ के नए notes print किए। इसका मतलब यह नहीं कि economy में net ₹100 करोड़ का नया पैसा पैदा हो गया। पुराने notes circulation से हट सकते हैं और नए notes उनकी जगह ले सकते हैं।

दूसरी तरफ banking system में loans और deposits के जरिए money creation की प्रक्रिया हो सकती है। यही वजह है कि money creation को केवल printing press से समझना अधूरा है।

अगर आप यह समझना चाहते हैं कि banks credit देकर money supply को कैसे प्रभावित करते हैं, तो हमारा पिछला लेख “पैसा कैसे बनता है? The Credit Creation” जरूर पढ़ें।

पैसा कैसे बनता है? The Credit Creation

बैंक पैसा कैसे बनाते हैं?

यह हिस्सा थोड़ा technical लग सकता है, लेकिन इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है।

मान लीजिए आपने बैंक में ₹1 लाख जमा किए। बैंक उस deposit को अपने banking operations में इस्तेमाल करता है और eligible lending के जरिए किसी दूसरे व्यक्ति को loan देता है।

जब loan borrower के bank account में deposit के रूप में दिखाई देता है, तो banking system में नया deposit money पैदा हो सकता है। Modern banking system में money creation की प्रक्रिया इसी तरह deposits, lending और repayment के साथ जुड़ी होती है।

यही कारण है कि economy में money केवल physical notes से बनी हुई नहीं होती।

इसलिए “भारत में पैसा कौन बनाता है?” का जवाब केवल “RBI” कह देना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

अगर सवाल specifically banknotes का है, तो RBI issuer है। लेकिन अगर सवाल broader money supply का है, तो central bank, commercial banks और पूरा financial system महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारतीय मुद्रा का भरोसा कहाँ से आता है?

किसी नोट की असली ताकत सिर्फ उसके कागज में नहीं होती।

₹500 के एक नोट को बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमत ₹500 नहीं होती। फिर भी वह नोट ₹500 के मूल्य पर स्वीकार किया जाता है।

क्यों?

क्योंकि currency को देश की monetary और legal व्यवस्था में official recognition प्राप्त है और लोग उस व्यवस्था पर भरोसा करते हैं।

RBI द्वारा जारी banknotes legal tender framework का हिस्सा हैं और ₹1 का note Government of India द्वारा issued legal tender है।

यही कारण है कि ₹500 का नोट सिर्फ एक printed piece of paper नहीं है। वह पूरे monetary system का हिस्सा है।

भारतीय मुद्रा और Digital Money में क्या अंतर है?

आज हम पहले की तुलना में कम cash का इस्तेमाल कर सकते हैं। UPI, cards, internet banking और दूसरे digital payment methods के कारण transaction केवल physical notes के माध्यम से नहीं होता।

इसके अलावा भारत में Digital Rupee यानी e₹ भी RBI द्वारा जारी Central Bank Digital Currency है। RBI के अनुसार e₹ भारत की physical currency यानी rupee का digital form है।

Digital Rupee को digital wallets में रखा और payments के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

RBI की Digital Rupee (e₹) FAQ देखें

इससे एक महत्वपूर्ण बात समझ आती है:

Money का मतलब सिर्फ जेब में रखे नोट नहीं हैं।

Modern economy में money का बड़ा हिस्सा banking और digital systems से जुड़ा हो सकता है।

क्या ज्यादा नोट छापने से हर कोई अमीर हो जाएगा?

यह सुनने में बहुत आसान solution लगता है। मान लीजिए देश में हर व्यक्ति के account में अचानक ₹10 लाख डाल दिए जाएं। क्या इससे सभी लोग अमीर हो जाएंगे?

जरूरी नहीं।

क्योंकि wealth केवल money की संख्या से नहीं बनती।

अगर लोगों के पास खर्च करने के लिए बहुत ज्यादा पैसा हो लेकिन goods और services की supply उसी अनुपात में न बढ़े, तो prices बढ़ने का दबाव पैदा हो सकता है।

उदाहरण के लिए किसी गांव में केवल 100 बोरी चावल उपलब्ध हैं और अचानक लोगों के पास खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसा आ जाए, तो चावल की कीमत बढ़ सकती है।

यानी पैसे की मात्रा बढ़ना और असली wealth बढ़ना अलग-अलग बातें हैं।

इसी फर्क को हमने अपने पिछले लेख “धन और पैसा में अंतर — Wealth vs Money” में विस्तार से समझाया है।

धन और पैसा में अंतर: Wealth vs Money

मुद्रा की जरूरत आखिर क्यों पड़ती है?

कल्पना कीजिए कि currency नाम की कोई चीज नहीं है। आपके पास गेहूं है और आपको मोबाइल खरीदना है। लेकिन मोबाइल दुकानदार को गेहूं की जरूरत नहीं है। वह बदले में कोई दूसरी चीज मांग सकता है।

यहीं barter system की समस्या सामने आती है—दोनों पक्षों की जरूरतें एक-दूसरे से match करनी चाहिए।

Currency इस समस्या को काफी हद तक आसान बनाती है।

अगर आप समझना चाहते हैं कि पैसे से पहले लोग वस्तुओं का आदान-प्रदान कैसे करते थे, तो हमारे पिछले लेख “Barter System in Hindi” को पढ़ सकते हैं।

Barter System क्या है?

समय के साथ society में currency का विकास हुआ और exchange तथा value measurement आसान हुआ। इसी विषय को आगे समझने के लिए हमारा लेख “मुद्रा क्या है?” भी उपयोगी रहेगा।

मुद्रा क्या है? Currency का अर्थ और महत्व

Currency Printing की पूरी प्रक्रिया को एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए RBI को अनुमान है कि आने वाले समय में ₹500 notes की जरूरत बढ़ सकती है।

सबसे पहले currency requirement का अनुमान लगाया जाता है। इसके बाद required quantity के अनुसार printing presses के लिए indent किया जाता है।

Printing press में security standards और निर्धारित specifications के अनुसार banknotes तैयार किए जाते हैं।

इसके बाद fresh notes RBI के currency management network में आते हैं। वहां से currency chests और banking network के माध्यम से notes अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचते हैं।

फिर banks इन्हें customers और businesses तक पहुंचाते हैं। जब ये notes बाजार में circulate होते हैं तो लोग इन्हें सामान खरीदने, services लेने, wages देने और दूसरे transactions में इस्तेमाल करते हैं।

समय के साथ कुछ notes वापस banks में आते हैं। Fit notes दोबारा circulation में जा सकते हैं, जबकि damaged और unfit notes को अलग करके निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार destroy किया जाता है।

और जरूरत के अनुसार नए notes circulation में लाए जाते हैं।

यानी Currency Printing एक continuous lifecycle का हिस्सा है।

एक नजर में समझिए—भारत में पैसा कैसे चलता है?

पूरी व्यवस्था को बहुत आसान तरीके से इस तरह समझ सकते हैं:

भारत सरकार
₹1 note और coins से जुड़ी जिम्मेदारियां

RBI
Banknotes issue करना
Currency management
Currency requirement का estimation
Currency distribution system manage करना
Clean Note Policy

Currency Printing Presses
Physical banknotes print करना

Currency Chests और Banks
Currency को store और distribute करना

Commercial Banks
Deposits और lending के जरिए broader money system में भूमिका निभाना

लोग और Businesses
Goods, services और payments के लिए money का इस्तेमाल करना

इस पूरी chain को समझने के बाद यह साफ हो जाता है कि “भारत में पैसा कौन बनाता है?” का जवाब केवल किसी एक संस्था के नाम तक सीमित नहीं किया जा सकता।

तो आखिर भारत में पैसा कौन बनाता है?

अब पूरे article का जवाब एक साथ देखते हैं।

भारत में banknotes कौन जारी करता है?

RBI।

भारत में नोट कौन छापता है?

भारत में banknotes चार authorised currency presses में print किए जाते हैं। इनमें दो SPMCIL की और दो RBI की subsidiary BRBNMPL की presses हैं।

₹1 का नोट कौन जारी करता है?

भारत सरकार।

सिक्के कौन बनाता है?

भारत सरकार की mints के माध्यम से coins mint किए जाते हैं।

क्या नोट छापना ही पैसा बनाना है?

नहीं। Physical currency printing और broader money creation अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

Commercial Banks की क्या भूमिका है?

Commercial banks deposits और lending के माध्यम से broader money creation process में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्ष: नोट छापने वाली मशीन से कहीं बड़ी है पैसे की कहानी

जब अगली बार आपके हाथ में ₹500 का नोट आए, तो उसे सिर्फ एक कागज का टुकड़ा मत समझिए। उस छोटे से नोट के पीछे एक पूरी व्यवस्था काम करती है—RBI, Government of India, currency printing presses, security features, banking system, currency chests और करोड़ों लोगों का भरोसा।

RBI banknotes जारी करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है, लेकिन RBI अकेले “सारा पैसा” नहीं बनाता।

नोटों की physical printing चार currency presses में होती है। ₹1 का नोट Government of India जारी करती है। Coins भी Government of India की जिम्मेदारी के अंतर्गत mint होते हैं। वहीं modern economy में money का बड़ा हिस्सा banking system और deposits से जुड़ा होता है।

इसलिए “नोट कौन छापता है?” और “पैसा कौन बनाता है?”—ये दो अलग सवाल हैं।

नोट छापना पैसा बनाने का सिर्फ एक हिस्सा है; पूरी money system उससे कहीं बड़ी है।

अगर आप भारतीय मुद्रा, पैसे के इतिहास और money creation को शुरुआत से समझना चाहते हैं, तो हमारे ऊपर दिए गए सभी related articles को क्रम से पढ़ सकते हैं। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि barter system से शुरू होकर currency और फिर modern banking money system तक हमारी आर्थिक व्यवस्था कैसे पहुंची।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. भारत में पैसा कौन बनाता है?

भारत में banknotes जारी करने का अधिकार मुख्य रूप से RBI (Reserve Bank of India) के पास है। हालांकि, पैसा केवल छपे हुए नोटों तक सीमित नहीं है। Commercial banks भी loans और deposits के माध्यम से money creation में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. भारत में नोट कौन छापता है?

भारत में banknotes की physical printing चार authorised currency presses में होती है। इनमें दो presses Government of India की SPMCIL के अंतर्गत और दो RBI की subsidiary BRBNMPL के अंतर्गत हैं। वहीं ₹1 का नोट भारत सरकार जारी करती है।

3. क्या RBI जब चाहे उतने नोट छाप सकता है?

नहीं। RBI को currency की जरूरत का अनुमान कई आर्थिक और व्यावहारिक factors को ध्यान में रखकर लगाना होता है। इसमें circulation में मौजूद notes, पुराने notes को replace करने की जरूरत, economic growth, inflation और digital payments जैसे factors शामिल होते हैं। इसलिए नोट छापना और पैसा बनाना एक ही चीज नहीं है।