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अपस्फीति क्या है? Deflation Meaning, कारण और Economy पर प्रभाव

जब किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें सामान्य रूप से और लगातार कम होने लगती हैं, तो इस स्थिति को Deflation यानी अपस्फीति कहा जाता है। पहली नजर में गिरती कीमतें लोगों के लिए अच्छी लग सकती हैं, क्योंकि उन्हें सामान कम कीमत पर मिल सकता है। लेकिन Economy के स्तर पर लगातार कीमतों में गिरावट कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।

अपस्फीति (Deflation) क्या है और कीमतों में गिरावट का Economy पर प्रभाव

इस लेख में हम Deflation Meaning, अपस्फीति का अर्थ, इसके मुख्य कारण, Economy पर प्रभाव, आम आदमी और व्यवसायों पर असर तथा Inflation और Deflation के बीच अंतर को आसान भाषा में समझेंगे।

Deflation क्या है?

Deflation वह आर्थिक स्थिति है जिसमें अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में लगातार गिरावट आती है। इसे हिंदी में अपस्फीति कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो जब केवल किसी एक वस्तु की कीमत नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में बड़ी संख्या में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें व्यापक रूप से नीचे जाने लगती हैं, तब उसे Deflation कहा जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी एक कंपनी के मोबाइल की कीमत कम हो जाती है, तो इसे Deflation नहीं कहा जाएगा। लेकिन यदि किसी Economy में लंबे समय तक भोजन, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेवाओं और दूसरी कई चीजों के सामान्य मूल्य स्तर में गिरावट आती रहे, तो यह Deflation की स्थिति हो सकती है।

International Monetary Fund (IMF) के अनुसार Deflation सामान्य मूल्य स्तर में लगातार गिरावट से जुड़ी आर्थिक स्थिति है।

Deflation Meaning: अपस्फीति का अर्थ

Deflation Meaning को अगर बहुत आसान भाषा में समझें, तो इसका अर्थ है अर्थव्यवस्था में सामान्य कीमतों का लगातार नीचे जाना। इसका हिंदी अर्थ अपस्फीति है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर Price Fall को Deflation नहीं कहा जा सकता। किसी विशेष वस्तु की कीमत मांग, उत्पादन लागत, मौसम, तकनीक या प्रतिस्पर्धा के कारण कम हो सकती है। Deflation का संबंध पूरी Economy के सामान्य Price Level में व्यापक और लगातार गिरावट से होता है।

Deflation में कीमतें क्यों गिरती हैं?

किसी Economy में कीमतें कई कारणों से नीचे जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण कारण तब सामने आता है जब लोगों और व्यवसायों की ओर से वस्तुओं और सेवाओं की Demand कम हो जाती है।

जब लोग कम खर्च करते हैं, तो कंपनियों को अपना सामान बेचने में कठिनाई हो सकती है। बिक्री बढ़ाने के लिए व्यवसाय कीमतें कम कर सकते हैं। यदि यह स्थिति बड़े स्तर पर और लंबे समय तक बनी रहती है, तो Economy के सामान्य मूल्य स्तर पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अलावा Money Supply में कमी, कर्ज की उपलब्धता कम होना, आर्थिक मंदी और लोगों का भविष्य को लेकर सावधानी से खर्च करना भी Deflationary pressure को बढ़ा सकता है।

Deflation के मुख्य कारण

1. मांग में कमी

Deflation का एक प्रमुख कारण Demand में कमी हो सकता है। जब लोग अपनी आय का कम हिस्सा खर्च करते हैं और खरीदारी को टालते हैं, तो बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की मांग घट सकती है। मांग कम होने पर व्यवसाय ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कीमतें कम कर सकते हैं।

2. Money Supply में कमी

अर्थव्यवस्था में उपलब्ध धन और ऋण की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। यदि Money Supply या कर्ज की उपलब्धता में पर्याप्त कमी आती है, तो लोगों और व्यवसायों के पास खर्च तथा निवेश के लिए कम धन हो सकता है। इससे मांग कमजोर पड़ सकती है और कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बन सकता है।

Money Supply को बेहतर ढंग से समझने के लिए आप हमारा Money Supply क्या है? M1, M2 और M3 का मतलब वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।

3. आर्थिक मंदी

जब Economy में आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ती हैं, तो लोगों की आय, खर्च और व्यवसायों का निवेश प्रभावित हो सकता है। कंपनियों की बिक्री कम होने पर वे उत्पादन घटा सकती हैं और कीमतों में कमी कर सकती हैं। लंबे समय तक कमजोर आर्थिक गतिविधि Deflationary pressure को बढ़ा सकती है।

4. कर्ज और खर्च में कमी

यदि लोग और व्यवसाय नए कर्ज लेने से बचने लगें और पुराने कर्ज को चुकाने पर अधिक ध्यान दें, तो अर्थव्यवस्था में नया खर्च कम हो सकता है। इससे बाजार में मांग कमजोर पड़ सकती है और कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है।

5. उत्पादन और तकनीक में बदलाव

कभी-कभी तकनीकी प्रगति और उत्पादन क्षमता बढ़ने से वस्तुओं की लागत कम हो सकती है। इससे कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि किसी एक क्षेत्र में कीमत कम होना अपने आप में पूरी Economy में Deflation होने का प्रमाण नहीं है।

Deflation का Economy पर क्या प्रभाव पड़ता है?

शुरुआत में Price Fall लोगों के लिए फायदेमंद दिखाई दे सकता है। लेकिन यदि कीमतों में लगातार और व्यापक गिरावट होने लगे, तो इसका प्रभाव Economy के कई हिस्सों पर पड़ सकता है।

उपभोक्ता खर्च कम कर सकते हैं

यदि लोगों को लगता है कि आज खरीदी जाने वाली वस्तु अगले महीने और सस्ती हो सकती है, तो वे खरीदारी को टाल सकते हैं। जब बहुत से लोग ऐसा करते हैं, तो बाजार में कुल मांग कम हो सकती है।

कम मांग से कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है और वे उत्पादन, निवेश तथा नए कर्मचारियों की भर्ती को कम कर सकती हैं।

व्यवसायों की आय प्रभावित हो सकती है

लगातार कीमतों में गिरावट के दौरान कंपनियों को अपने उत्पाद कम कीमत पर बेचने पड़ सकते हैं। यदि बिक्री मूल्य कम होता जाए लेकिन वेतन, किराया और दूसरी लागतें उसी अनुपात में कम न हों, तो कंपनियों का लाभ कम हो सकता है।

लाभ में कमी के कारण व्यवसाय निवेश और विस्तार की योजनाओं को टाल सकते हैं। इससे Economy में आर्थिक गतिविधियां और धीमी हो सकती हैं।

रोजगार पर असर पड़ सकता है

यदि कंपनियों की बिक्री और आय लंबे समय तक कमजोर रहती है, तो वे लागत घटाने की कोशिश कर सकती हैं। इसका असर नई नौकरियों की संख्या, कर्मचारियों के वेतन और कभी-कभी रोजगार पर भी पड़ सकता है।

कर्ज का बोझ बढ़ सकता है

Deflation के दौरान कीमतें और आय घट सकती हैं, लेकिन पुराने कर्ज की मूल राशि उसी स्तर पर बनी रहती है। इसलिए वास्तविक रूप से कर्ज चुकाना अधिक कठिन हो सकता है। यही कारण है कि लंबे समय तक रहने वाली Deflation कर्जदारों के लिए चुनौती बन सकती है।

Deflation का आम आदमी पर क्या असर होता है?

आम व्यक्ति के लिए Deflation का प्रभाव हमेशा एक जैसा नहीं होता। यदि वस्तुओं की कीमतें कम हो रही हों और व्यक्ति की आय स्थिर बनी रहे, तो उसकी Purchasing Power बढ़ सकती है और वह समान पैसे में अधिक सामान खरीद सकता है।

लेकिन यदि कीमतों में गिरावट के साथ आय, रोजगार या व्यवसाय के अवसर भी कमजोर होने लगें, तो कम कीमतों का लाभ उतना बड़ा नहीं रह जाता। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि सामान सस्ता हो रहा है या नहीं; यह भी देखना जरूरी है कि लोगों की आय और रोजगार की स्थिति कैसी है।

Purchasing Power को विस्तार से समझने के लिए आप Purchasing Power of Money यानी पैसे की कीमत पर हमारा लेख पढ़ सकते हैं।

Deflation और Purchasing Power का संबंध

Deflation और Purchasing Power के बीच संबंध को समझना आसान है। जब कीमतें कम होती हैं और व्यक्ति की आय समान रहती है, तो उसके पैसे से पहले की तुलना में अधिक वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। इस स्थिति में पैसे की वास्तविक क्रय शक्ति बढ़ सकती है।

लेकिन पूरी Economy के स्तर पर लगातार Deflation होने पर आय, रोजगार, निवेश और व्यवसायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए केवल बढ़ती Purchasing Power को देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि Deflation हमेशा अच्छी होती है।

Deflation और Inflation में अंतर

Inflation और Deflation एक-दूसरे के विपरीत दिशा में काम करने वाली स्थितियां हैं। Inflation में Economy के सामान्य मूल्य स्तर में वृद्धि होती है, जबकि Deflation में सामान्य मूल्य स्तर में गिरावट होती है।

आधारInflationDeflation
अर्थसामान्य कीमतों में वृद्धिसामान्य कीमतों में गिरावट
कीमतों की दिशाऊपरनीचे
पैसे की Purchasing Powerआमतौर पर घटती हैआमतौर पर बढ़ सकती है
मांगकई परिस्थितियों में मजबूत हो सकती हैकमजोर पड़ सकती है
अर्थव्यवस्था पर प्रभावबहुत अधिक Inflation नुकसानदायक हो सकती हैलगातार Deflation आर्थिक गतिविधियों को कमजोर कर सकती है

Inflation को आसान भाषा में समझने के लिए आप हमारा महंगाई यानी Inflation क्या है? वाला लेख भी पढ़ सकते हैं।

IMF के Inflation संबंधी विवरण में भी Inflation और कीमतों में व्यापक बदलाव को समझाया गया है।

Deflation का आसान उदाहरण

मान लीजिए किसी Economy में एक परिवार हर महीने लगभग 20,000 रुपये की वस्तुएं और सेवाएं खरीदता है। यदि सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में वही सामान कुछ समय बाद 19,000 रुपये में मिलने लगे, तो पहली नजर में परिवार को फायदा दिखाई देगा।

लेकिन अब मान लीजिए कि कीमतों में लगातार गिरावट के कारण लोग खरीदारी टालने लगते हैं। दुकानदारों की बिक्री घटती है, कंपनियों का लाभ कम होता है और वे उत्पादन तथा भर्ती घटाने लगती हैं। इससे लोगों की आय प्रभावित हो सकती है और वे आगे और कम खर्च कर सकते हैं।

इस तरह कीमतों में गिरावट से शुरू हुई स्थिति मांग, बिक्री, आय और रोजगार को प्रभावित करते हुए पूरी Economy में कमजोर आर्थिक गतिविधियों का कारण बन सकती है। यही वजह है कि Deflation को केवल “सामान सस्ता होना” समझना सही नहीं है।

क्या Deflation हमेशा बुरी होती है?

नहीं, हर कीमत में गिरावट को अपने आप में बुरा नहीं कहा जा सकता। किसी नई तकनीक के कारण किसी उत्पाद की उत्पादन लागत कम हो जाए और उसकी कीमत घट जाए, तो इससे उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है।

समस्या तब अधिक गंभीर हो सकती है जब पूरी Economy में कीमतों का सामान्य स्तर लंबे समय तक गिरता रहे और इसके साथ मांग, निवेश, आय तथा रोजगार भी कमजोर होने लगें। इसलिए Deflation का मूल्यांकन उसके कारण, अवधि और Economy पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव के आधार पर किया जाता है।

अपस्फीति को समझना क्यों जरूरी है?

अपस्फीति को समझने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि Economy में केवल कीमतों का बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कीमतों का लगातार गिरना भी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

Deflation को समझते समय Money Supply, Demand, Purchasing Power, Inflation और Economic Growth जैसे concepts को साथ में देखना उपयोगी होता है। इन सभी के बीच संबंध को समझने से अर्थव्यवस्था में कीमतों के बदलाव को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

क्रय शक्ति के बारे में और जानने के लिए हमारा क्रय शक्ति क्या है? वाला लेख भी उपयोगी रहेगा।

निष्कर्ष

Deflation यानी अपस्फीति वह स्थिति है जिसमें Economy के सामान्य मूल्य स्तर में व्यापक और लगातार गिरावट आती है। इसमें कीमतों का कम होना पहली नजर में उपभोक्ताओं के लिए अच्छा लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली Deflation मांग, व्यवसाय, निवेश, रोजगार और कर्ज की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

इसलिए Deflation को केवल Price Fall के रूप में देखना सही नहीं है। इसे समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि कीमतों में गिरावट क्यों हो रही है और उसका पूरी Economy पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Deflation क्या है?

Deflation यानी अपस्फीति वह स्थिति है जिसमें Economy में वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में व्यापक और लगातार गिरावट आती है।

Deflation का हिंदी अर्थ क्या है?

Deflation का हिंदी अर्थ अपस्फीति है। इसका सामान्य अर्थ अर्थव्यवस्था में सामान्य कीमतों के स्तर में लगातार गिरावट से है।

Deflation क्यों होता है?

Deflation मांग में कमी, Money Supply और ऋण की स्थिति में बदलाव, आर्थिक मंदी तथा अन्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण हो सकता है।

क्या किसी एक वस्तु की कीमत कम होना Deflation है?

नहीं। किसी एक वस्तु या सेवा की कीमत में गिरावट को सामान्यतः Deflation नहीं कहा जाता। Deflation का संबंध Economy के सामान्य मूल्य स्तर में व्यापक और लगातार गिरावट से है।

Deflation और Inflation में क्या अंतर है?

Inflation में Economy के सामान्य मूल्य स्तर में वृद्धि होती है, जबकि Deflation में सामान्य मूल्य स्तर में गिरावट आती है।

क्या Deflation में Purchasing Power बढ़ती है?

यदि कीमतें कम हों और व्यक्ति की आय स्थिर रहे, तो उसके पैसे की Purchasing Power बढ़ सकती है। लेकिन लंबे समय तक Deflation रहने पर आय, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

क्या Deflation आम आदमी के लिए अच्छी होती है?

कम कीमतें उपभोक्ता के लिए लाभदायक हो सकती हैं, लेकिन लगातार और व्यापक Deflation Economy में मांग, रोजगार, आय और व्यवसायों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इसे केवल सस्ती कीमतों के आधार पर अच्छा या बुरा नहीं कहा जा सकता।

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